सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित || Satyanarayan Pooja vidhi in Hindi and Sanskrit

|| श्री सत्यनारयन पूजा पद्धति ||
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भगवन श्री हरि विष्णु 


हरि ॐ !! मित्रों स्वागत है आपका आस्था दरबार में आज मै आपको श्री सत्यनारायण पूजा विधि के बारे में बताने जारहा हूँ | इसमें पंचदेवता विष्णु पुजाअंग देवता पूजन , सत्यनारायण कथा, आरती आदि की  सम्पूर्ण विधि का समावेश करने की कोशिश की गयी है , उम्मीद है ये आपलोगों पसंद आएगी | यदि कोई  त्रुटी रह गयी हो तो माफ़ कीजियेगा | ये पोस्ट आपको कैसा लगा हमसे जरूर साझा करें | तो चलिए आगे बढ़ते हैं -

सत्यनारायण पूजन के समय ध्यान देने योग्य बातें |



१. विशेषतः सत्यनारायण भगवान् का पूजन शाम (संध्या) के समय करना चाहिए ऐसा कथा मे भी दिया गया है।

२. प्रदोषकाल के समय सत्यनारायण भगवान् का पूजन निषिद्ध मना गया है ( ये मान्यता खासकर मैथिलि ब्राह्मण समाज में देखने को मिलता है)।

३. दक्ष के वचनानुसार-"देवकार्याणि पूर्वांहे मनुष्याणां तु मध्यमे। पितृणामराहे तु कार्याण्येतानि यत्नतः।" पूर्वाहन के समय सत्यनारायण पूजा करना चाहिए ।

४. विष्णुपुराण के अनुसार- गणेश को तुलसी, विष्णु को अक्षत आ शिव को शंखक जल नहि चढ़ाना चाहिए । यदि किसी और के लिए पूजन करना हो तो संकल्प के समय उस व्यक्ति (यजमान) का गोत्र और नाम जोड़ना चाहिए तथा "अहं करिष्ये" के स्थान पर "करिष्यामि" का उपयोग करना चाहिए। यदि पूजा किसी कामना से कर रहे हैं तो उस कामना का नाम भी संकल्प के समय बोलना चाहिए।

५. कलशस्थापना-संकल्प के कुछ लोग कलशस्थापन करते हैं तो कुछ लोग नहीं करते, क्योकि रात्री के समय कलशस्थापन निषेध है। मत्स पुराण में कहा गया है, "न रात्रौ स्थापन कार्य न च कुम्भाभिषेचनम्।" अर्थात् रात्रि में कलशस्थापन या कलश के जल से अभिषेक निषेध है। रात्रि के समय शुभ सूचक हेतु जल से भरे पात्र में आम का पल्लव, सुपारी और द्रव्य डालकर पंचोपचार पूजन करने का व्यवहार है।

६. यदि पूजा करनेवाला व्यक्ति मन्त्र पढने में असमर्थ हो तो घ्यान पूर्वक मन्त्र का श्रवण करते हुए पूजन करना चाहिए । “श्रुतं हरति पापानि" अर्थात मन्त्र सुनने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं ।

७. यदि कोई वस्तु पूजन के समय उपलब्ध नहीं हो तो, उसके स्थान पर जल चढ़ाना चाहिए।

८. नैवेद्य- "नैवेद्यं दक्षिणे वामे, न च पुरतो न पृष्ठतः।" अथात् नैवेद्य हमेशा अपने दाहिने भाग में लगाना चाहिए। 

९. दीप- घी का दीपक हो तो देवता के दाहिने भाग में रखना चाहिए तथा यदि तेल का दीपक हो तो बाएँ भाग में रखना चाहिए | 

१०. धूप- धूप हमेशा बाएँ भाग में रखना चाहिए।

११. कीर्तमुख पूजा- सत्यनाराण पूजन के बाद शिव-पार्थिव पूजा से पहले कीर्तमुख का पूजा पञ्चोपचार करना चाहिए, रात्रि के समय कीर्तमुखक पूजा नहीं करना चाहिए ।

१२. एक मिटटी का महादेव बनाकर उसपर गौड़ी शंकर की पूजा करनी चाहिए।

१३. ब्रह्मपूजा- ब्रह्मपूजा भी इस पूजा का अंग है इसीलिए  बचा हुआ अक्षत,चन्दन,फूल आदि वस्तु से एकहि बार - ॐ ब्रह्मण इहागच्छ इहतिष्ठ, ॐ ब्रह्मणे नमः। कहते हुए भूमिपर पूजन करना चाहिए। समंत्र ब्रह्मपूजा निषेध है स्कन्द पुराण के वचन- 


"अद्य प्रभृति यः पूजां मंत्रयुक्तां करिष्यति।
 तव (ब्रह्म) मा धरापृष्ठे यथाऽन्येषां दिवौकसान्।। 
भविष्यति च तद्वंशो दरिद्रो दुःखसंयुतः।।"


सत्यनारायण पूजन प्रारंभ






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    5 टिप्पणियां

    1. Aap ka prayas uttam hai. Kintu esme kuchh part opnen nahi hota. Jaise ki poojan ki prarambhik taiyari, gauri sankar poojan, brahma poojan,havan,visarjan ka page.Jis se aapka prayas adhoora rah jata.

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    2. जय श्री सत्यनारायण भगवान की जय हो ।

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    3. आदरणीय,ब्रम्हा पूजन से लेकर विसर्जन तक का पेज नहीं खुलता है, कृपया स्पष्ट करें।

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    4. सर बहुत अच्छा लगा पढ कर कृपया इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करे जिससे हमे मदद मिलेगी 🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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    आस्था दरबार से जुड़ने के लिए धन्यवाद ||
    ||जय श्री राधे ||